जीवामृत क्या है? जीवामृत बनाने की विधि, उपयोग और लाभ (Jeevamrut Complete Guide)

Jeevamrut Kya Hota Hai: जीवामृत बनाने की विधि और लाभ | Complete Guide

जीवामृत क्या है? जीवामृत बनाने की विधि, उपयोग और लाभ (Jeevamrut Complete Guide)

भारत में Organic Farming (जैविक खेती) का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग ने मिट्टी की उर्वरता को नष्ट कर दिया है। ऐसी स्थिति में Jeevamrut (जीवामृत) एक वरदान बनकर उभरा है। यह न केवल पौधों के लिए पोषक तत्व प्रदान करता है, बल्कि मिट्टी के सूक्ष्मजीवों को पुनर्जीवित करने में भी सक्षम है।

विषय सूची (Table of Contents)

  1. जीवामृत का परिचय (Introduction to Jeevamrut)
  2. जीवामृत के मुख्य घटक (Key Ingredients)
  3. जीवामृत बनाने की विधि (Step-by-Step Process)
  4. जीवामृत में वैज्ञानिक क्रिया (Scientific Mechanism)
  5. जीवामृत के लाभ (Benefits for Soil and Plants)
  6. उपयोग करने का तरीका (Method of Application)
  7. सावधानियां और भंडारण (Precautions and Storage)

1. जीवामृत का परिचय (What is Jeevamrut?)

जीवामृत एक अत्यंत प्रभावशाली Bio-fertilizer और Plant Growth Promoter है। इसका आविष्कार मुख्य रूप से ‘शून्य बजट प्राकृतिक खेती’ (Zero Budget Natural Farming – ZBNF) के जनक Subhash Palekar द्वारा किया गया था। यह कोई उर्वरक नहीं है, बल्कि एक ऐसा संवर्धन है जो मिट्टी में मौजूद जीवाणुओं की संख्या को करोड़ों गुना बढ़ा देता है।

जब हम रासायनिक खाद जैसे Urea या DAP का प्रयोग करते हैं, तो मिट्टी के मित्र कीट और केंचुए मर जाते हैं। जीवामृत इन्हीं सूक्ष्मजीवों को सक्रिय करने का कार्य करता है। यह एक किण्वित (Fermented) उत्पाद है जिसे गाय के गोबर, मूत्र, गुड़ और बेसन के मिश्रण से तैयार किया जाता है।

2. जीवामृत बनाने के लिए आवश्यक सामग्री (Required Ingredients)

जीवामृत तैयार करने के लिए आपको बहुत ही साधारण और घर पर उपलब्ध सामग्री की आवश्यकता होती है। 200 लीटर जीवामृत बनाने के लिए निम्नलिखित सामग्री चाहिए:

  • Desi Cow Dung (देसी गाय का गोबर): 10 किलोग्राम (ताजा गोबर सबसे उत्तम माना जाता है)।
  • Desi Cow Urine (देसी गाय का गोमूत्र): 5 से 10 लीटर (जितना पुराना हो, उतना अच्छा)।
  • Jaggery (गुड़): 1 से 2 किलोग्राम (बिना रसायन वाला काला गुड़)।
  • Pulse Flour (बेसन): 1 से 2 किलोग्राम (चना, अरहर, मूंग या किसी भी दाल का आटा)।
  • Forest Soil (मिट्टी): मुट्ठी भर मिट्टी (ऐसी जगह की जहाँ रासायनिक खाद का प्रयोग न हुआ हो, जैसे बरगद या पीपल के नीचे की मिट्टी)।
  • Water (जल): लगभग 200 लीटर।

3. जीवामृत बनाने की विस्तृत विधि (Step-by-Step Preparation)

जीवामृत बनाने की प्रक्रिया बहुत सरल है, लेकिन इसमें शुद्धता और सही अनुपात का ध्यान रखना अनिवार्य है। नीचे दी गई प्रक्रिया का पालन करें:

चरण 1: मिश्रण की तैयारी

सबसे पहले एक प्लास्टिक का बड़ा ड्रम (200 लीटर क्षमता वाला) लें। इसमें 200 लीटर पानी भर दें। ध्यान रहे कि ड्रम लोहे या किसी अन्य धातु का न हो, क्योंकि धातु सूक्ष्मजीवों की क्रिया में बाधा डाल सकती है।

चरण 2: गोबर और गोमूत्र का मिलाना

एक अलग बर्तन में 10 किलो गाय का गोबर और थोड़ा पानी मिलाकर घोल तैयार कर लें ताकि उसमें गांठें न रहें। इस घोल को और 10 लीटर गोमूत्र को ड्रम के पानी में डाल दें।

चरण 3: मीठा और प्रोटीन स्रोत जोड़ना

अब इसमें 2 किलो गुड़ और 2 किलो बेसन मिलाएं। गुड़ सूक्ष्मजीवों के लिए ऊर्जा (Energy) का स्रोत है और बेसन उन्हें प्रोटीन (Protein) प्रदान करता है, जिससे उनकी संख्या तेजी से बढ़ती है।

चरण 4: सजीव मिट्टी का उपयोग

अंत में, मुट्ठी भर बरगद के पेड़ के नीचे की मिट्टी डालें। इस मिट्टी में प्राकृतिक रूप से Beneficial Bacteria और फंगस होते हैं जो बीज की तरह कार्य करते हैं।

प्रो टिप: मिश्रण को लकड़ी के डंडे से घड़ी की सुई की दिशा (Clockwise) में 2-3 मिनट तक हिलाएं। इसे दिन में दो बार (सुबह और शाम) हिलाना आवश्यक है।

चरण 5: किण्वन प्रक्रिया (Fermentation)

ड्रम को जूट की बोरी से ढक दें और छांव में रखें। इसे सीधी धूप से बचाएं। 48 से 72 घंटों (गर्मियों में 2-3 दिन और सर्दियों में 5-7 दिन) के भीतर जीवामृत बनकर तैयार हो जाता है।

4. जीवामृत के पीछे का विज्ञान (The Science Behind Jeevamrut)

जीवामृत केवल एक खाद नहीं है, यह एक Microbial Culture है। गाय के गोबर और मूत्र में करोड़ों लाभकारी बैक्टीरिया जैसे Nitrogen Fixing Bacteria और Phosphate Solubilizing Bacteria होते हैं।

जब हम इसमें गुड़ और बेसन डालते हैं, तो यह बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम करता है। किण्वन (Fermentation) की प्रक्रिया के दौरान, ये सूक्ष्मजीव संख्या में अरबों गुना बढ़ जाते हैं। जब यह घोल मिट्टी में डाला जाता है, तो यह मिट्टी के कार्बनिक पदार्थ को विघटित कर पौधों को सुलभ रूप में पोषक तत्व उपलब्ध कराता है।

5. जीवामृत के चमत्कारी लाभ (Benefits of Using Jeevamrut)

जीवामृत के प्रयोग से खेती में व्यापक सकारात्मक बदलाव देखे जा सकते हैं:

  • Soil Fertility (मिट्टी की उर्वरता): यह मिट्टी की संरचना में सुधार करता है और उसे भुरभुरा बनाता है।
  • Earthworm Activation (केंचुओं की सक्रियता): जीवामृत मिट्टी में सुप्त अवस्था में पड़े केंचुओं को सक्रिय करता है, जो गहराई से मिट्टी को खोदकर उसे उपजाऊ बनाते हैं।
  • Cost Effective (कम लागत): इसके निर्माण में बहुत कम खर्च आता है, जिससे किसानों की Input Cost कम होती है।
  • Yield Quality (उपज की गुणवत्ता): जीवामृत से उगाई गई फसलें रासायनिक मुक्त, स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक होती हैं।
  • Water Retention (जल धारण क्षमता): यह मिट्टी की नमी सोखने और उसे बनाए रखने की शक्ति को बढ़ाता है।

6. उपयोग करने का सही तरीका (Method of Application)

जीवामृत का प्रयोग विभिन्न तरीकों से किया जा सकता है:

  1. सिंचाई के साथ (Flood Irrigation): सिंचाई के पानी के साथ मुख्य नाली में एक मटके या ड्रम से बूंद-बूंद करके जीवामृत गिराएं। एक एकड़ के लिए 200 लीटर पर्याप्त है।
  2. ड्रिप सिंचाई (Drip Irrigation): जीवामृत को बारीक कपड़े से छान लें ताकि ड्रिप की नलियां जाम न हों। इसे Venturi System के माध्यम से फसलों को दें।
  3. पर्णीय छिड़काव (Foliar Spray): फसलों पर छिड़काव के लिए इसे छानकर प्रयोग करें। 10 लीटर पानी में 1 लीटर जीवामृत मिलाकर स्प्रे करें।

7. महत्वपूर्ण सावधानियां (Key Precautions)

जीवामृत के अधिकतम लाभ के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:

  • हमेशा केवल Indian Desi Cow के गोबर और मूत्र का ही प्रयोग करें। हाइब्रिड या जर्सी गाय का प्रभाव कम होता है।
  • तैयार होने के 7 से 10 दिनों के भीतर इसका उपयोग कर लेना चाहिए। अधिक समय तक रखने पर इसकी प्रभावशीलता कम हो जाती है।
  • जीवामृत को कभी भी रासायनिक उर्वरकों या कीटनाशकों के साथ न मिलाएं।
  • इसे सीधे सूर्य के प्रकाश में न रखें, हमेशा छायादार स्थान का चुनाव करें।

निष्कर्ष (Conclusion)

जीवामृत टिकाऊ खेती और Sustainable Agriculture की आधारशिला है। यदि हम अपनी मिट्टी को बचाना चाहते हैं और आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ भोजन देना चाहते हैं, तो हमें रसायनों को त्यागकर जीवामृत जैसे प्राकृतिक विकल्पों को अपनाना होगा। यह न केवल हमारी धरती माता को स्वस्थ बनाता है, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करता है।

अधिक जानकारी के लिए आप Indian Council of Agricultural Research (ICAR) और Department of Animal Husbandry and Dairying की आधिकारिक वेबसाइट्स देख सकते हैं।

जीवामृत छिड़काव की समय-सारणी (Foliar Spray Schedule)

फसल की विभिन्न अवस्थाओं में जीवामृत का छिड़काव करने से पौधों की वृद्धि और कीट प्रतिरोधक क्षमता में जबरदस्त सुधार होता है। नीचे दी गई तालिका के अनुसार छिड़काव करें:

छिड़काव का समय जीवामृत की मात्रा पानी की मात्रा उद्देश्य
1. प्रथम छिड़काव (बुवाई के 15-20 दिन बाद) 5 लीटर 100 लीटर पौधों की शुरुआती वृद्धि और जड़ विकास।
2. द्वितीय छिड़काव (बुवाई के 40-45 दिन बाद) 10 लीटर 150 लीटर शाखाओं का विस्तार और स्वस्थ पत्ते।
3. तृतीय छिड़काव (फूल आने से पहले) 20 लीटर 200 लीटर अधिक फूलों का आना और झड़ने से रोकना।
4. चतुर्थ छिड़काव (फल/दाना बनते समय) 10 लीटर 200 लीटर फलों का आकार बढ़ाना और चमक लाना।

नोट: छिड़काव हमेशा सुबह या शाम के समय करें जब धूप कम हो। तेज धूप में छिड़काव करने से पत्तों पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।

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